Ad







Breaking

BREAKING NEWS Breaking News Ajmer Breaking News: ।

Post Top Ad



मैरिज ब्यूरो


Wednesday, August 19, 2020

राजस्थान के रेवेन्यू रिकॉर्ड में रावणा-राजपूत जाति नाम से जुड़ी अन्य जातियों नामों को संशोधित कर एक ही जाति नाम ’रावणा राजपूत’ से दर्ज की मांग को लेकर दिया ज्ञापन ।

 जयपुर ।  अखिल राजस्थान रावणा राजपूत महासभा के प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र रावणा सहित प्रतिनिधि मण्डल ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को राजस्थान के रेवेन्यू रिकॉर्ड में रावणा-राजपूत जाति नाम से जुड़ी अन्य जातियों जैसे हजूरी, वजीर, दरोगा, हवलदार , कोतवाल, कोठारी, भण्डारी आदी समान जाति नामों को संशोधित कर एक ही जाति नाम ’रावणा राजपूत’ से दर्ज करवाने बाबत एक ज्ञापन पुनः स्मरण हेतु राजसम्पर्क पोर्टल पर 17 अगस्त 2020 को दर्ज करवाया है। जिसमे बताया गया है कि राजस्थान में रावणा-राजपूत जाति को कई पद सूचक जाति नामों से जाना जाता है, जो इस प्रकार है - दरोगा, हजूरी, वजीर, हवलदार, कोतवाल, कोठारी, भण्डारी आदि। विगत कुछ वर्षो से राज्य सरकार द्वारा अन्य पिछडे वर्ग के जाति प्रमाण पत्र मामले में भी काफी सरलीकरण किया है। बावजूद इसके तहसीलदार व अन्य स्तर पर प्रार्थी पक्षों से रेवेन्यू रिकोर्ड मांगा जाता है तो जाति प्रमाण पत्र के आवेदन पत्र में पटवारी हल्का रिपोर्ट के अलावा अन्य दो राजकीय कर्मचारी गवाह की भी रिपोर्ट मांगी जाती है। इसके अलावा आवश्यक हुआ तो श्रीमान् द्वारा रावणा राजपूत समाज के पंजीकृत संगठनों से भी रिपोर्ट मांगी जाती है। फिर भी प्रार्थी को अन्त में रेवेन्यू रिकॉर्ड के कारण जाति नाम के चयन पर समस्या आती है।

संक्षिप्त में रावणा राजपूत जाति नाम का इतिहास :- 

सामन्तकाल में गरीब और भूमिहीन राजपूतों को जीविकोपार्जन हेतु दासप्रथा का सामना करना पडा़, तत्कालीन व्यवस्थाओं में जिन पदों पर नौकरियां करते थे। उन्ही पदनामों को जाति के रूप में स्वीकार करना पड़ा ताकि भविष्य में भी मूल जाति /वर्ग में समावेश न कर सके। हमारी हिन्दू जातिय व्यवस्था के कारण इन पदनामों को तो स्वीकार करना ही पड़ा साथ ही साथ इन मक्कार व कुंठित इतिहासकारों की पदनामों के बारे में अश्लील व अशोभनीय टिप्पणियों को आज भी सामाजिक शोषण के रूप में सहन कर रहे हैं।हमारे पूर्वजों ने आर्य समाज व संस्कृति से प्रेरित होकर इन पदसूचक जाति नामों को नकारते हुए सन 1904 के आस पास रावणा राजपूत (राजपूतों की योद्धा जाति) शब्द को जाति के रूप में स्वीकार किया जिसे सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछडा मानते हुए काका कालेलकर व मण्डल कमीशन ने भी जाति के रूप में ओबीसी में भी स्वीकार किया। और आज राजस्थान ही नहीं अन्य राज्यों में भी अप्रवासी समाज बन्धुं जिनके रेवेन्यू रिकोर्ड में दरोगा , हजुरी , वजीर, हवलदार , कोतवाल , कोठारी , भण्डारी आदी दर्ज है उन्होने भी इस जातिनाम को जाति के रूप में स्वीकार कर सर्वव्यापी पहचान कायम की है। अतः स्पष्ट है कि राजस्थान और केन्द्र की ओ.बी.सी. की सूची में भी दरोगा, रावणा-राजपूत, हजूरी, वजीर सभी समान जाति नाम की एक ही सर्वव्यापी पहचान है, इसलिए ओ.बी.सी. की सूची में समस्त जातिनाम एक ही क्र.स. पर भी दर्ज है। ज्ञापन में मांग कि गई कि राजस्थान के रेवेन्यू रिकॉर्ड में रावणा-राजपूत जाति नाम से जुड़ी अन्य जातियों जैसे हजूरी, वजीर, दरोगा, हवलदार, कोतवाल, कोठारी, भण्डारी आदी समान जाति नामों को संशोधित कर एक ही जाति नाम ’रावणा राजपूत’ से दर्ज करावें और रावणा राजपूत समाज का स्वाभिमान बढावें।

Post Top Ad



Pages