Ad







Breaking

BREAKING NEWS Breaking News Ajmer Breaking News: ।

Post Top Ad



मैरिज ब्यूरो


Monday, September 15, 2025

मुख्यमंत्री से मिला रावणा राजपूत समाज का प्रतिनिधिमंडल, समाज की पहचान और अधिकारों को लेकर सौंपा ज्ञापन

समाज की पहचान का प्रश्न

रावणा राजपूत समाज के प्रदेश अध्यक्ष रणजीत सिंह सोडाला ने मुख्यमंत्री के समक्ष अपनी बात रखते हुए कहा कि आज भी समाज से जुड़े लोगों के नामों में मुगलकालीन पदनाम जैसे दरोगा, हजूरी, वजीर आदि दर्ज किए जाते हैं। यह न केवल समाज की मूल पहचान को धूमिल करते हैं, बल्कि एक प्रकार से अपमानजनक भी हैं। उन्होंने मांग रखी कि अब समय आ गया है कि राजस्व अभिलेखों और सरकारी दस्तावेजों में केवल "रावणा राजपूत" नाम ही अंकित किया जाए। यह बदलाव समाज की अस्मिता, सम्मान और एक नई पीढ़ी को स्वाभिमान के साथ जीने की प्रेरणा देगा।

आरक्षण का मुद्दा

नागौर जिला अध्यक्ष रणवीर सिंह बिरलोका ने समाज के प्रतिनिधित्व और आरक्षण को लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एमबीसी (Most Backward Classes) को अलग से आरक्षण मिला है, उसी तर्ज पर रावणा राजपूत सहित ओबीसी की अत्यंत पिछड़ी जातियों को विशेष आरक्षण मिलना चाहिए। समाज की आर्थिक और शैक्षिक स्थिति को देखते हुए यह कदम बेहद जरूरी है।

उन्होंने यह भी मांग रखी कि समाज के किसी योग्य और काबिल व्यक्ति को किसी बोर्ड या निगम का चेयरमैन बनाया जाए और उसे राज्य मंत्री का दर्जा दिया जाए। इससे समाज को राजनीतिक प्रतिनिधित्व मिलेगा और समाज की आवाज़ सरकार तक आसानी से पहुँच सकेगी।

समाज के नायक मेजर दलपत सिंह शेखावत

प्रतिनिधिमंडल ने समाज के वीर सपूत और हैफा हीरो कहे जाने वाले मेजर दलपत सिंह शेखावत की स्मृति में उनके पैतृक निवास देवली में पैनोरमा बनाने की भी मांग रखी।

मेजर दलपत सिंह का योगदान

1918 में प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फिलिस्तीन के हैफा युद्ध में मेजर दलपत सिंह ने अद्भुत शौर्य और पराक्रम का प्रदर्शन किया। उन्होंने ब्रिटिश इंडियन आर्मी की ओर से लड़ते हुए दुश्मन को मात दी और भारत के पराक्रम का डंका बजाया। हैफा युद्ध में दिए गए उनके बलिदान को विश्वभर में याद किया जाता है। उन्हें "हैफा हीरो" के नाम से जाना जाता है।

समाज की मांग है कि उनकी स्मृति में न केवल देवली में पैनोरमा बने, बल्कि मेजर दलपत सिंह बोर्ड का गठन भी हो। इससे युवाओं को प्रेरणा मिलेगी और आने वाली पीढ़ियाँ अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित होंगी।

महिला प्रतिनिधित्व और शिक्षा का सवाल

महिला प्रदेश महामंत्री निशा कँवर गौड़ ने समाज के बच्चों को ओबीसी प्रमाण पत्र बनवाने में आ रही कठिनाइयों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि समाज के विद्यार्थी जब सरकारी नौकरियों या शिक्षा में आरक्षण का लाभ लेना चाहते हैं तो उन्हें प्रमाणपत्र बनाने में कई बाधाओं का सामना करना पड़ता है। यह समस्या जल्द से जल्द हल होनी चाहिए, ताकि समाज का कोई भी बच्चा अपने अधिकार से वंचित न रहे।

मुख्यमंत्री का आश्वासन

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों को गंभीरता से सुना और आश्वासन दिया कि समाज की समस्याओं का शीघ्र समाधान किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि समाज की पहचान और सम्मान से जुड़ा हर मुद्दा सरकार की प्राथमिकता में रहेगा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि रावणा राजपूत समाज का इतिहास राजस्थान की गौरवशाली धरोहर है और समाज को राजनीतिक व सामाजिक प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए हरसंभव प्रयास किए जाएंगे।

समाज की चुनौतियाँ

रावणा राजपूत समाज आज भी शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व के क्षेत्र में पिछड़ा हुआ है। गाँव-ढाणी में रह रहे समाज के अधिकांश लोग खेती-बाड़ी और श्रम पर निर्भर हैं। शिक्षा के क्षेत्र में जागरूकता की कमी और सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलने के कारण समाज पिछड़ता गया।

आरक्षण और पहचान के सवाल केवल सरकारी लाभ तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह समाज की स्वाभिमान और अस्तित्व से जुड़े मुद्दे हैं।

सामाजिक एकता का संदेश

प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश के विभिन्न जिलों से आए पदाधिकारियों ने एकजुट होकर अपनी बात रखी। इसमें भीलवाड़ा से महिला प्रदेश महामंत्री निशा कँवर गौड़, भाजपा ओबीसी प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष भगवत सिंह राठौड़, प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट पीरू सिंह गौड़ और भेरू सिंह गुरला सहित अनेक पदाधिकारी उपस्थित रहे।

इस एकजुटता ने यह साबित किया कि समाज अब संगठित होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए तैयार है।

भविष्य की राह

ज्ञापन सौंपे जाने और मुख्यमंत्री के आश्वासन के बाद समाज में नई ऊर्जा का संचार हुआ है। अब यह समाज की जिम्मेदारी होगी कि वह शिक्षा, संगठन और जागरूकता की दिशा में काम करे।

राजनीति और प्रशासन में प्रतिनिधित्व तभी संभव है जब समाज की युवा पीढ़ी शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़े और अपनी प्रतिभा साबित करे


Post Top Ad



Pages